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Syeda Roshan

Drama Romance Classics

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Syeda Roshan

Drama Romance Classics

शाम का अक्स

शाम का अक्स

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शाम का हर अक्स आंखों में उतरने दो
क्यों कैद है ज़ुलफै बिखरे तो बिखरने दो

शरीफौं की मेहफिल में अब वो मज़ा नहीं 
अभी भोला है दिल बिगडे तो बिगड़ने दो

परेशान हूं बहुत बिगडी हुई किस्मत से
साथ दे दो अपना किस्मत संवरने दो

आओ कभी दिल में रुह को घर कर लो
मुझे आंखों से दिल में उतरने दो

उजालों को तरसता हूं हर तरफ‌ अंधेरे हैं
रौशन करदो ज़िन्दगी अंधेरों से बिछड़ने दो



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