STORYMIRROR

Ajay Gupta

Horror

4  

Ajay Gupta

Horror

पूर्णमासी रात में

पूर्णमासी रात में

1 min
242

शहर के उस पार 

उस सुनसान हवेली में

नहीं जाता कोई 

पूर्णमासी रात में


कहते हैं कुछ लोग बाग 

उस सुनसान हवेली में 

अपने आप बत्तियां जलती है 

उठता है धुंआ गहरा काला 

पूर्णमासी रात में


निकलते हैं चमगादड़ 

गूँजती है चीखें आत्माओं की 

सुन दूर रोती है लोमड़ी 

अंदर हंसती है कटी खोपड़ी 

पूर्णमासी रात में


ना जाने कब से 

पास बने कब्र से 

बुलाती है आवाजें 

भटकती है रूहें 

पूर्णमासी रात में


किसी ने आज तक नहीं देखा 

वहीं चीखती अजीब डरावनी रेखा 

काली सायों में कब्र से निकली 

तड़पती भटकती पुकारती रेखा 

पूर्णमासी रात में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Horror