STORYMIRROR

Ajay Gupta

Others

4  

Ajay Gupta

Others

रात्रि और दिवस

रात्रि और दिवस

1 min
344

सर्वत्र उज्जवल धवल सा प्रकाश 

पूर्ण चंद्र सुशोभित बीच आकाश 

निशाचर निकले करने आखेट 

विचित्र ध्वनियों से भरा वन्य प्रांत 


ऊँचे तरु वर जैसे योद्धा विशाल 

सर्प राज और मृगराज जैसे करे वार्तालाप 

अन्य जीव भी दुबक कर 

सुने निशाचरों के नृशंस आलाप


पत्तियों को धो कर करे यौवन शृंगार 

धरा पर मोती डाले दो अदृश्य कुमार

फूलों को गंध से भर, जा पहुंचा नभ द्वार 

चंद्रिका के रथ पर चढ़ जाने लगे कुमार 


आदित्य ने भेजे पहले भेजे, अपने अरुणिम कुमार 

चंद्रिका किसी तरह ले भागी रात्रि मृदु कुमार 

सर्वत्र लालिमा है विस्तृत, गाए आदित्य स्तुति गान 

खग कलरव कर सुनाए अपने मृदु गान 


बिखरे मोती को उठाने आ गया वीर प्रकाश राज 

नभ में अरुणता वापस आयी अपने नाथ के पास 

दूर कहीं मंदिर में शंख घंटा बाजे ले प्रभु के नाम 

दूर गांव में हलधर चले अपने अपने काम 


दूर आदित्य देख रहा देता सबको ज्ञान प्रकाश 

नमन है भास्कर, भर दो जीवन में उल्लास। 


Rate this content
Log in