STORYMIRROR

Ajay Gupta

Drama Romance

4  

Ajay Gupta

Drama Romance

रंग

रंग

2 mins
312

काली मेरी दुनिया है काली 

गायब सारे रंग अदृश्य सब प्राणी 

मैं हूँ जन्मजात अंधा 

सुना है रंगों की दुनिया निराली 


अब रास्ते स्टिक ही बताते है 

कितनी बार चोट खा समझ पाते है

कभी लड़खड़ाते कभी गिर भी जाते है 

ना जाने कितनी बार लोग हमे बचाते है


किसी भले मानुस की आँखे जब हमे मिली 

अंधेरे और कालेपन से तब मुक्ति थी मिली 

अब रोज का ऑफिस जाना कितना आसान लगे 

प्रकृति के बदलते रूप जैसे भरते नव प्राण लगे 


कहीं बैंगनी कहीं लाल तो कहीं पीले फूल खिले 

कहीं बारिश कहीं प्रकाश तो कभी कोहरे सब ढके 

कहीं हरी पत्तियों को ओढ़े वृक्ष विशाल मिले 

मंदिर में राधा श्याम और बाहर हज़ारों सुदामा खड़े 


जीवन के इस मोड़ पर

घर वालों ने एक दुविधा लायी 

अंधेरेपन की मेरी साथी 

उसके शादी के प्रस्ताव ठुकराई 


सुन्दर, गुणवती और जो भरे उजाला 

विजय बहुत है रिश्ते आते 

जिस नर्क से तू निकला 

उसी में फिर नहीं है जाते 


अगर हम ना बने किसी के उजाला 

व्यर्थ ही यह आँख हम पाए 

हम से अच्छे यह पशु 

मिल बाट सब कष्ट भगाए 


बहुत हुई बातचीत और बात बंद 

आखिर यही हुआ जैसी तेरी मर्जी 

माना यह था बड़ा फैसला 

सम्भाल लेना हमे भगवान सुन मेरी अर्जी 


हमारी शादी जैसे रोचक जग सारा 

जैसे काले आसमान में चमके ध्रुव तारा 

शैली की दुनिया में कुछ रंग भर आए 

हमारा साथ नव ऊर्जा बन जग पर छाए 


हँसते रूठते मनाते बीत जाएगी जिंदगी 

सहारा देते कभी लेते बीत जायेगी जिंदगी 

किसी नेत्र दान की तलाश है 

पर प्यार से हर राह भी बनाएगी जिंदगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama