कोई किसी को क्या दे दिलासा, कैसे पोंछे आंसू हाथ बंधे हुए, हर कोई बेबस, लाचार, उदास कोई किसी को क्या दे दिलासा, कैसे पोंछे आंसू हाथ बंधे हुए, हर कोई बेबस, लाचार...
बड़े घराने की औलाद जैसी दिखती थी जिसका नाम बड़े प्यार से महंगू ने चुनिया रखा। बड़े घराने की औलाद जैसी दिखती थी जिसका नाम बड़े प्यार से महंगू ने चुनिया रखा।
तुम मुझे याद करना जब तुम तन्हा हो जाओ। तुम मुझे याद करना जब तुम तन्हा हो जाओ।
कौन सी रात ज्यादा भयानक थी , मैं समझ नहीं पाऊं।। कौन सी रात ज्यादा भयानक थी , मैं समझ नहीं पाऊं।।
अपराध और रात का एक अजीब सा नाता है रात का सन्नाटा अपराध की कहानी सुनाता है। अपराध और रात का एक अजीब सा नाता है रात का सन्नाटा अपराध की कहानी सुनाता है।
आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है। आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है।
तक सुन पाओगे मिट जाएगा जब तेरी सृष्टि से तेरा ही विधि विधान।। तक सुन पाओगे मिट जाएगा जब तेरी सृष्टि से तेरा ही विधि विधान।।
भैया संग छुपकर, मूवी डरावनी देखी माँ-पापा सो रहे बेखबर निद्रा उन पर हावी थी भैया संग छुपकर, मूवी डरावनी देखी माँ-पापा सो रहे बेखबर निद्रा उन पर ह...
आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था। आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था।
गुत्थी सुलझ ना पाई आज तक उस रहस्यमयी रात की। गुत्थी सुलझ ना पाई आज तक उस रहस्यमयी रात की।
कहते हैं अब वो युवक भी उस वीराने का हिस्सा है। कहते हैं अब वो युवक भी उस वीराने का हिस्सा है।
क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है? क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है?
जल रहा था टूट जाने के बाद उसको इस बात की समझ आई। जल रहा था टूट जाने के बाद उसको इस बात की समझ आई।
रात में बिना डरे सफर करे निडर हो कर घर सलामत आ सके तभी मेरे भारत की स्वच्छ छवि जीवित रात में बिना डरे सफर करे निडर हो कर घर सलामत आ सके तभी मेरे भारत की स्वच्छ छ...
मैं दर्द लिखने बैठा, मगर उसे लिख ना सका। मैं दर्द लिखने बैठा, मगर उसे लिख ना सका।
सुनसान सड़क तेज हवाएंँ हो रही थी बारिश की बौछार। सुनसान सड़क तेज हवाएंँ हो रही थी बारिश की बौछार।
यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है कभी अम्मी जैसा ख़्वाब ... यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है क...
वो उस बियावान को भयाक्रांत कर देती है अपने रुग्ण विलाप से वो उस बियावान को भयाक्रांत कर देती है अपने रुग्ण विलाप से
बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं। बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं।
वो बूंदें कैसी थी जिन पर दर्पण भी शोक मनाता है, वो बूंदें कैसी थी जिन पर दर्पण भी शोक मनाता है,