कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से। कैसे जीवन जीऊंगी अब, काँप रही जीवनदान से।
आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है। आज उस बात को बीते हुए करीब दस साल गुज़र चुका है।
नितिन कहता है।" मैं भी बकरे का मटन खाऊंगा विथ फ्राइड राइस,!! वीरेन कहता है," चिकन मसाल नितिन कहता है।" मैं भी बकरे का मटन खाऊंगा विथ फ्राइड राइस,!! वीरेन कहता है," ...
भैया संग छुपकर, मूवी डरावनी देखी माँ-पापा सो रहे बेखबर निद्रा उन पर हावी थी भैया संग छुपकर, मूवी डरावनी देखी माँ-पापा सो रहे बेखबर निद्रा उन पर ह...
मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली दुनिया मरहम को इंकार करता वो देश और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की ओर चली दुनिया
सामने दीवार बनकर हो जाये हम खड़े। सामने दीवार बनकर हो जाये हम खड़े।
कृपा निधान कृपा करो हम सब पर, प्रभु अब तो लगता है बहुत हमें डर। कृपा निधान कृपा करो हम सब पर, प्रभु अब तो लगता है बहुत हमें डर।
आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था। आंखें खुल गई/अब मैं भयमुक्त थी तुम्हारा हाथ मेरे हाथों में था।
हृदय विदारक है तेजाबी हमला, हाय कैसे इसके क्रूर दंश से बचे अबला ? हृदय विदारक है तेजाबी हमला, हाय कैसे इसके क्रूर दंश से बचे अबला ?
बंदिशों की जंजीरें तोड़कर फूंकने आ रहा हूँ में तेरी नफ़रत की लंका को। बंदिशों की जंजीरें तोड़कर फूंकने आ रहा हूँ में तेरी नफ़रत की लंका को।
गुत्थी सुलझ ना पाई आज तक उस रहस्यमयी रात की। गुत्थी सुलझ ना पाई आज तक उस रहस्यमयी रात की।
बचपन से जिस भूतिया जंगल के बारे में सुनता आ रहा था। बचपन से जिस भूतिया जंगल के बारे में सुनता आ रहा था।
आनंद का उत्सव था, मातम में बदल गया हाथ थामे कौन किसका, हर कोई डर गया। आनंद का उत्सव था, मातम में बदल गया हाथ थामे कौन किसका, हर कोई डर गया।
पर उन्हें तोड़ आगेे बढ़ने पर वह हमको सलामी दे जाएगा। पर उन्हें तोड़ आगेे बढ़ने पर वह हमको सलामी दे जाएगा।
सुनसान सड़क तेज हवाएंँ हो रही थी बारिश की बौछार। सुनसान सड़क तेज हवाएंँ हो रही थी बारिश की बौछार।
वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में नहाना दो वो तितली पकड़ना फिर सावधानी से छोड़ देना क्या कला थी, पेड़ पर लटकना चढ़ना नदी में...
बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं। बहा दो बुराइयों को ही कहीं, पाप से बिछड़ने का डर नहीं।
जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं। जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं।
आज उसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है शायद उसे अपना बचपन याद आ रहा है आज उसके आंसू पोंछने वाला कोई नहीं है शायद उसे अपना बचपन याद आ रहा है
हेलोवीन के नाम से देखो मौत सिखाते हैं बच्चों को ।। हेलोवीन के नाम से देखो मौत सिखाते हैं बच्चों को ।।