प्रेम
प्रेम
प्रेम एक भाषा है
प्रेम एक अभिलाषा है
मन में उठने वाली तरंग
मन में होने वाली उमंग।
प्रेम वो शब्द है
जिनको बोल की जरूरत नहीं
प्रेम वो भाव है
जिनको मोल भाव की जरूरत नहीं।
प्रेम एक भावना है
जिससे जुड़े सबके मन है
प्रेम एक वचन है
जिससे जुड़े सबके तन है।
प्रेम वो एहसास है
जो सबके लिए खास है
प्रेम वो प्रभाव है
जिससे सबको पड़ता प्रभाव है।
प्रेम वो लेन देन है
जिसमें आप थोड़ा सा प्रेम देकर
ज्यादा से ज्यादा प्रेम पा लेते है
और सबके मन को मोह लेते है।
प्रेम के व्यापार में
ना कोई उधार है
ना कोई ब्याज है
यहां तो बस प्रेम का हिसाब है।

