STORYMIRROR

Anuradha Negi

Tragedy Others

4  

Anuradha Negi

Tragedy Others

फिर वही हुआ

फिर वही हुआ

1 min
295

खुश हो गई थी मैं आजकल कुछ दिनों से 

मिली ही नहीं थी जो किसी से सदियों से ,

मैं उम्मीद कुछ ज्यादा लगाती गई थी उससे 

यूं आमना सामना मेरा हुआ ही न था जिससे।

आज तक समझ ही ना पाई बस एक ही बात 

क्या इतने ज्यादा मूल्यहीन थे, हैं मेरे जज्बात,

जो हर बार आने वाला मोल भाव करता है 

और मैं कठोर बन जाऊं तो फिर मुकरता है।

एक शिकायत तो आज पापा से भी है मेरी 

कि क्यों इतना कोमल दिल बनाया था मेरा,

कठोर पत्थर के जैसा यदि पिरोया होता इसे 

तो बस के बाहर होता बनाना और का बसेरा।

आज रोना और सिर्फ रोना चाहता है मन मेरा 

हर दर्द से परिचित हो गया है मेरा रोम रोम 

आंसू आंखों के अंदर हैं, दर्द उभरता सीने में

दूसरे को रोशन करता जैसे जलता हुआ मोम।


  


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy