मेरी गली में....
मेरी गली में....
1 min
329
अभी तो आई हूँ मैं इस नई गली में
पहचान हो गयी है यहाँ हर किसी से
सब ऐसा लगता है जैसे हो जाना सा
जीव हो या इंसान हैं सब पहचाना सा।
बात है अब दो उन जीवों की
जो रहते तो थे मेरी ही गली में
पर गली थी उनकी कोई घर नहीं
लगता था किसी से उनको डर नहीं।
पर जब मिलता था उन्हें कोई निवाला
एक ने था अपना स्वभाव बदल डाला
अब बन गया था वो स्वार्थी मित्र
सिर्फ खाने पर हो जाता था विचित्र।
