STORYMIRROR

Anuradha Negi

Others

4.1  

Anuradha Negi

Others

मेरी गली में....

मेरी गली में....

1 min
323

अभी तो आई हूँ मैं इस नई गली में

पहचान हो गयी है यहाँ हर किसी से

सब ऐसा लगता है जैसे हो जाना सा

जीव हो या इंसान हैं सब पहचाना सा। 

बात है अब दो उन जीवों की 

जो रहते तो थे मेरी ही गली में

पर गली थी उनकी कोई घर नहीं

लगता था किसी से उनको डर नहीं। 

पर जब मिलता था उन्हें कोई निवाला

एक ने था अपना स्वभाव बदल डाला

अब बन गया था वो स्वार्थी मित्र 

सिर्फ खाने पर हो जाता था विचित्र। 



Rate this content
Log in