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Anuradha Negi

Inspirational

4.4  

Anuradha Negi

Inspirational

अंतिम...

अंतिम...

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ऐ साल की आखिरी रात..
सब कलह मिटा लेना...,
आने वाली सुबह है पहली
जी भर के गले लगा लेना।
सफर है कितना क्या पता
प्यार खुशी में जी लेना....  
अपने पन का आनंद देकर 
अपनत्व को पी लेना।
घाव होंगे कितने ही मन में 
सुई धागा सा मिल कर सी लेना
चंद पलों का जीवन है ये 
इसे हजारों जन्म सा जी लेना।
मन को करना जल सा साफ
दिलों की गंध को धो लेना
ऐ साल की आखिरी रात
सब कलह मिटा लेना।।
क्या तुम होगी इंसान सी बदलती
तो हर बार आकर मिल लेना
जो न बन पाओ संगी साथी तुम
बस एक बार पुष्प सा खिल लेना।
क्यों कहती हो बुराई भुला देना
क्या सब नया पर्याप्त होगा
कुछ तो समेट कर रखूं पत्तों सा
तेरे काम न आए तो जला लेना।।
जब जाएगी विदा होके तू 
फिर मिलन की उम्मीद देना 
ऐ साल की अंतिम घड़ी तू
फिर नई बनकर मिल लेना।





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