STORYMIRROR

क़लम-ए-अम्वाज kunu

Tragedy

4  

क़लम-ए-अम्वाज kunu

Tragedy

मेरी कविताएं

मेरी कविताएं

1 min
230

उसे याद कर लिखना चाहा कुछ तो

आँखों से ओस के जैसी ठंडी एक बूँद आँसू की टपक पड़ी

और पन्नो पे गाहे-बगाहे फैल गई

जिसे फिर कुछ लोगों ने कविता बोल तारीफों के खूब पुल बाँधे

विचित्र है न

हाँ मेरे लिये भी बहुत, खैर

इससे मैं ये तो समझ गया बखूबी कि

मेरी कविताएँ और कुछ नहीं बस

आँसू में घुली आख़िरी सिसकी की अवशेष मात्र है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy