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JAYANTA TOPADAR

Drama Tragedy Others

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JAYANTA TOPADAR

Drama Tragedy Others

नक़ाबपोश...

नक़ाबपोश...

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इन सत्रह सालों में मैं

अनगिनत नक़ाबपोश चेहरों से

रुबरु हुआ...

मैंने कई ऐसे दोहरे मापदंड के

लोगों से मुलाक़ात की,

जिनके रग-रग में निज स्वार्थ मात्र के सिवा

किसी दूसरे के हित में सोचने तक की

'मंशा ही नहीं'...!


मैं कई ऐसे स्वार्थी तत्वों से वाकिफ हुआ, जिनका इरादा ही किसी इंसान से

अपना 'मतलब निकल जाने के बाद'

बड़ी बेग़ैरती से 'अपना मुँह फेर लेना' होता है...!


मैंने कई बेशर्म चुगलखोर नक़ाबपोशों के

दोहरे चरित्र से पर्दा उठते देखा है...!

मैंने अनगिनत बेशर्म चापलूसों को

महज़ अपने फायदे के लिए ही

'पावर चेयर' पर विराजमान

उच्चाधिकारियों के तलवे

चाटते हुए भी देखा है...!


मैंने आज के आधुनिक

गृहभेदी विभीषणों का भी

नकाब उतरते देखा है,

जिन्होंने बेईमानी एवं कूटनीति से

(बस अपना उल्लू सीधा करने के लिए)

एक सुसंगठित कार्य स्थल को ही

निराधार तरीके से बरबाद करके रख दिया...!


हाय, ये मानसिकता...!!!

अपने सामने किसी अन्य लायक इंसान की

प्रशंसा सुनने से भी प्रत्यक्ष रूप में

नाखुश एवं नाराज़ खुदगर्ज लोगों का

तमाशा भी देखा है...!


किसी दूसरे की कर्मोन्नति से ईर्ष्या रखनेवाले...

किसी सुप्रतिष्ठित सहकर्मी के

पैरों तले ज़मीन तक खोदने की 

हर संभव कोशिश करनेवाले

धोखेबाज़ों को भी पहचाना है,

जिनके दिमाग में कुछ, दिल में कुछ

और ज़ुबान पे कुछ और ही

खिचड़ी पकती रहती है...!


इन सत्रह सालों में दुनियादारी की पूरी

दास्ताँ ही जैसे मैंने इन तथाकथित

बेग़ैरत लोगों की भीड़ में लिख डाली...

और क्या कहूँ उन धोखेबाज़ों की

धोखाधड़ी की दास्तां...!


हर गली, हर कूचे, हर मोहल्ले और हर एक महफिल में

ऐसे नक़ाबपोश छिपे बैठे हैं,

जो 'इधर-की-बात-उधर' और

'उधर-की-बात-इधर' करते रहने में

अपनी कामयाबी समझते हैं...।


आप अगर उन दोहरे चरित्र के

गद्दार लोगों से बचकर नहीं रहेंगे,

तो वो आपका पूरा वजूद ही

मिटा कर रख देंगे...

वो आपकी खुशहाल-कामयाब ज़िंदगी में

धोखे से शामिल होकर...

आपकी कमज़ोरियों को जानकर,

अपना सही समय आने पर

(यानि कि आपके मुसीबत के समय)

उनका पर्दाफाश कर

अपनी गंदी आदत से

बाज़ नहीं आएंगे...।


हाँ, ऐसे नक़ाबपोश चेहरे

बेशक़ आपके भोलेपन को

जालसाज़ी से अपने फायदे के लिए ही

इस्तेमाल करेंगे...!

इसलिए आप स्वयं अक्लमंद बनें एवं शीघ्रातिशीघ्र उन नक़ाबपोशों के

चेहरों से नक़ाब उतार फेंकें...

उससे ही इस समाज का 

सही संस्कार हो पाएगा,

वरना वो लोग तो इंसानियत को ही

दीमक-सा नष्ट कर देंगे...!!!



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