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JAYANTA TOPADAR

Abstract Action Inspirational

4  

JAYANTA TOPADAR

Abstract Action Inspirational

मैं और मेरी ज़िन्दगी...

मैं और मेरी ज़िन्दगी...

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4

मैं रोज़ पैदल चलकर
ये नापा करता हूँ
कि मैं और कितनी दूर
निकल पाने के लायक़ हूँ...!

इस जद्दोजहद भरी ज़िन्दगी के
हर एक मोड़ पे मुझसे अक्सर
रूबरू होता है एक सवाल...
और उस सवाल का
जवाब ढूँढ़ते-ढूँढ़ते
मैं अनजाने में ही
बहुत दूर निकल पड़ता हूँ...!

जायज़ है कि मुझे
ठहराव पसंद नहीं :
मुझे गतिमान रहना मंज़ूर है...,
मगर आँखें मुंद कर यूँ ही
दूसरों के नक़्शेकदम पर चलना
मुझको हरगिज़ गवारा नहीं...!!!

मेरे कदमों के तले
मेरे मजबूत भरोसे की पकड़ है...!
इसलिए मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता
कि दुनिया मेरे बारे में
क्या राय रखती है...!

क्योंकि मुझे मेरी मंज़िल का
ठिकाना मालूम है
और मुझको ये पता है कि
मुझे जाना कहाँ है...!


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