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JAYANTA TOPADAR

Comedy Drama Tragedy

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JAYANTA TOPADAR

Comedy Drama Tragedy

ओ अकाउंटेंट बाबू...!!!

ओ अकाउंटेंट बाबू...!!!

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अकाउंटेंट बाबू, आपने ऐसा क्यों किया...?
आपको एक बार उस इंसान की माली हालत पे इंसानियत के नाते
ज़रा-सा ग़ौर करना चाहिए था....
उन्होंने अपने कार्यस्थान से 
सन 2025 के नवंबर महीने में
सोलह दिनों का बहुत ज़रूरी
अवकाश लिया था,
क्योंकि उनकी धर्मपत्नी गर्भवती थीं...
और निसंदेह ऐसी अवस्था में हर हाल में अपनी अर्धांगिनी का
साथ देना उनका परम कर्तव्य था...
इसमें कौन सा गुनाह किया था उस कर्त्तव्यनिष्ठ सह शिक्षक ने
कि महीने के आखिर में
सामान्य-सी तनख्वाह में से
पूरे तेरह दिनों का रूपए 
सीधे कर्तन कर दिया गया...???

अकाउंटेंट बाबू, आप तो अपनी कार द्वारा
अपनी सहूलियत के अनुसार
हर संभव दूरी तय कर पाने में
पूर्णतया समर्थ हैं...
मगर वे बेचारा सह शिक्षक तो
पैदल ही अपने रास्ते निकल पड़ते हैं...!!!

आपको इस बात का तनिक भी एहसास नहीं, अरे ओ अकाउंटेंट बाबू
कि एक ईमानदार शिक्षक
किस दशा में अपना गुज़रबसर कर रहे हैं...!!!

'बेसरकारी' विद्यालय की
एक मजबूर, ईमानदार, अनुभवी
एवं 'प्राइवेट ट्यूशन' का
कभी सहारा न लेनेवाले
'प्रोबेशन पीरियड' में कार्यरत
सह शिक्षक की 'आर्थिक हालात' को
अंततः 'मानवता सहित' समझते हुए तथाकथित 'ऑफिशियल नियम' चलाकर (अपनी धर्मपत्नी की 'प्रेग्नेंसी पीरियड' के दौरान 'ड्यूटी' में से
'सोलह दिनों की जरूरी अनुपस्थिति' के 'तेरह दिनों की' उनकी 'तनख्वाह' में से (उनके लिए बहुत ज़रूरी) 'सोलह हज़ार रुपए' क्या 'वियोग किए बिना'
एकदम नहीं रह सकते थे...???

एकाग्रचित भाव से इस संगठन में वर्ष 2006 से लेकर अब तक
विभिन्न विद्यालयों में सच्चे मन से
सेवा करनेवाले एक सह शिक्षक का
आप सबसे बार- बार एक ही 'सवाल' है (ज़रा गौर कीजिएगा...!) --
 "सर्विस रूल्स" बड़ी या 'इंसानियत' ???

आप सबने तो एक 'सच्चे' इंसान के
आत्मसम्मान पर सीधे 'वार' किया है !
अब तो उन्होंने इस 'चोट' को
अपने दिल पे ले लिया है...
देखिए, आप सबने तो
एक 'सीधे-साधे' इंसान की
सोच को ही 'पेचीदा' कर दिया है...!!!
ऐसा 'नहीं' करना चाहिए था, अकाउंटेंट बाबू...!!!
ये बहुत 'ग़लत' है!!!

ऐसे अगर चलता रहा तो, याद रखिए,
आनेवाला कल
बहुत संकटमय होगा...!!!
आप सबको यह बात
बार-बार सोचनी चाहिए
कि आप भविष्य के लिए
क्या तैयार कर रहे हैं...!!!
अनिश्चिततापूर्ण कार्यकाल या
विश्वास से भरा कार्यकाल ???

खोलिए, हे महानुभावों !!! अपनी ज्ञानचक्षु खोलिए, वरना हम सबका
सुनहरे भविष्य का सपना
अनिश्चित काले बादलों के पीछे
हमेशा के लिए गुम जाएगा
...!!!


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