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JAYANTA TOPADAR

Drama Tragedy Action

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JAYANTA TOPADAR

Drama Tragedy Action

कान खोलकर सुन लीजिए, अकाउंटेंट बाबू...!!!

कान खोलकर सुन लीजिए, अकाउंटेंट बाबू...!!!

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अपने तकलीफदेह 'प्रोबेशन पीरियड' में 
एक बेसरकारी विद्यालय में सुदीर्घ काल से 
ईमानदारी से सेवा करने वाले
एक सच्चे शिक्षक की
घोर पारिवारिक संघर्षमय स्थिति 
को मानवतापूर्ण ह्रदय से
न समझते हुए
मेरी तनख्वाह में से
मेरे ही हक़ का
एडवांस में कुछ रुपये न देकर
आपने मुझे जो 
दुःख-कष्ट-वेदना दी है,
उसकी भरपाई आप
ज़िन्दगी भर नहीं कर पाएंगे,
ओ अकाउंटेंट बाबू !!!

एक दिन ऐसा
आपके साथ भी होगा,
जब आप भी
पाई-पाई को मोहताज़ होंगे...
ये तो तय है, ओ अकाउंटेंट बाबू !
आपको भी एक दिन उस दौर से
बेशक़ गुज़ारना होगा...!!!

आज आप बड़े शान-ओ-शौक़त से 
अपनी चौपहिए वाहन से
इस विद्यालय का दौरा लगाकर 
तथाकथित 'ऑफिसियल' नियम चलाकर
'ऐसा-वैसा' बहुत कुछ
करते नज़र आ रहे हैं, ओ अकाउंटेंट बाबू, जो कि मेरी ज़िन्दगी में जबरन
अनिश्चित अमावस-काल ला रहे हैं...

उस ऊपरवाले से मैं, असहाय शिक्षक
ये गुहार लगता हूँ कि
विधाता आपको भी ऐसी दिराहे पर
लाकर खड़ा करे
और उस पल, ओ अकाउंटेंट बाबू !
आप भी इस 'टेबल' से
उस 'टेबल' तक का
दौड़ लगाएं...
और आपको भी
मुंह की खानी पड़े...!!!

उस दिन आपको भी
भलीभांति ये एहसास होगा,
ओ अकाउंटेंट बाबू,
कि किसी ज़रूरतमंद इंसान का
जेब खाली होने पर
उसे दर-ब-दर कितनी
ठोकरें खानी पड़ती है...
और कितनी ज़िल्लत
सहनी पड़ती है...!!!

आएगा, ओ अकाउंटेंट बाबू !
मेरा भी 'टाइम' आएगा...
और उस दिन मैं भी आपको 
जल बिन मछली की तरह
तड़पते हुए देखूंगा...
और आपसे पूछूंगा :
"अब कैसा लग रहा है???"



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