ओ मेरे भाई !!!
ओ मेरे भाई !!!
ओ मेरे भाई, विक्टर ! आज चाहे
आपकी कोई कद्र नहीं
हमारे कुछ तथाकथित रिश्तेदारों की भरी महफिलों में...
क्योंकि आज आपके पास कोई निश्चित उपार्जन का उपाय नहीं...!
मगर मेरे भाई, उन्होंने आपके बीते हुए सालों की जद्दोजहद और
त्याग को देखकर भी अनदेखा किया...
यह उनकी गलतफहमी थी
जो कि वो एक दिन भलीभांति समझ जाएंगे...!!
ओ मेरे भाई, विक्टर ! ज़ाहिर है कि
हमारे किसी रिश्तेदार ने आपकी खामोशी के पीछे की इतिहास के पन्नों को
पलटकर पढ़ने को
थोड़ा-सा वक्त भी निकाल नहीं पाया,
ये कितनी अफसोस की बात है...!!!
हम सब ये भलीभांति जानते हैं कि
आप ने बीते समय में
असम के बाहरी राज्यों में
कहां-कहां क्या-क्या काम किया
और कैसी-कैसी तकलीफें सही...
और वक्त की कितनी हेराफेरी देखी...
कैसे हमारे जाने-पहचाने लोगों से भी
विपरीत रवैया देखने को मिला...
ऊपरवाला ही उसका एकमात्र गवाह है!!
और यहां असम में भी किन किन लोगों ने आपको सीधे मुंह नकार दिया,
दुत्कार दिया...
आपसे दुर्व्यवहार किया...
हां, मेरे भाई, विक्टर ! हम सबको
वो वाकया आज तक याद है...
क्योंकि ज़ाहिर है कि
आज के मशीनी युग में
एक साधारण पुरुष की कमाई ही
पहले पूछी जाती है,
आश्चर्य की बात है कि कभी भी
उसका साफ़ चरित्र और संस्कार नहीं देखा जाता ।
ओ मेरे भाई, विक्टर ! आप एक बात भलीभांति समझ लीजिए
कि ये पूरा कलियुग का
घोर ग्रहणकाल चल रहा है...!!!
ये बड़ी अजीब बात है
कि चाहे आप किसी
गलत रास्ते से ही क्यों न,
दूसरों को ठग कर या फिर
धोखाधरी करके ही क्यों न
अपनी जेबें भरें...मगर
उन तथाकथित रिश्तेदारों की
भरी महफिलों में
आपका जोशोखरोश से
इस्तक़बाल होगा
और आप भी
वाहवाही का पात्र बनेंगे !!!
