STORYMIRROR

Pooja Agrawal

Abstract Drama Romance

4  

Pooja Agrawal

Abstract Drama Romance

गुज़र गया

गुज़र गया

1 min
74

लाजमी था उम्र और मौसम का गुजर जाना

पर वह तो मेरा इश्क था वह भी गुजर गया

हर कोई आया जिंदगी में कुछ देर साथ के लिए

अपनी मंज़िल का राहगीर था वह भी गुजर गया

कितनी मुद्दतें बीत गई उसके इंतजार में

यह जो पल बचाया था वह भी गुजर गया

पतझड़ के पत्तों को फिजां में देख मन भरते थे

एक मौसम ही तो था वह भी गुजर गया

आज आइना भी धुंधला पड़ गया है मेरा

चेहरे में उतरा उसका अक्स गुज़र गया

दिल में रहता था मेरी मिल्कियत था वो

वो धड़कन गुजर गई वो जिगर गुजर गया

कोई सुराग मिले तो राह पकड़ लूं उसकी

वह हवा का झोंका था मुझे छूकर गुजर गया।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract