STORYMIRROR

Pooja Agrawal

Abstract Romance Tragedy

3  

Pooja Agrawal

Abstract Romance Tragedy

तेरी कमी है

तेरी कमी है

1 min
298

ख़्वाबों के परिंदों ने उड़ान भरी है

मंजिले पास है लेकिन तेरी कमी है


दम भरता है तेरा इश्क मुझ में

वर्ना हिज्र के बाद जान पर आ बनी है


अफ़सोस नहीं कोई मुक्द्दस उल्फत का

पर आँख में आज भी नमी है


उल्फत जगा कर खुदा मुख्तलिफ हो गया

पर जो शिकस्ता हुआ वो आदमी है


दिल शाद था तुझ से मिलने के बाद सय्योनी

हमारी जिंदगानी आज भी वही थमी है


यूंँ तो कोई उम्मीद नहीं नजर आती

तुझे पाने की इसलिए मोतज्जा़ पर मौकूफ़ लाज़मी है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract