STORYMIRROR

Sudhir Srivastava

Abstract

5  

Sudhir Srivastava

Abstract

खुश रहने की वजह

खुश रहने की वजह

2 mins
487


ईमानदारी से बताइएगा आप सब हमको

कि हम झूठ कहते हैं

और आप ऐसा बिल्कुल नहीं करते।

पर मैं जानता हूं कि हम नहीं आप झूठ बोल रहे हैं

हम भी आपका दोष नहीं दे रहे हैं।

पर सच तो यह है कि हम खुद ही

खुश रहना ही नहीं चाहते हैं

और खुश रहने की वजह ढूंढते हैं,

अपने आपको ही बेवकूफ बनते हैं

खुद ही खुद को गुमराह करते हैं

बेचारी वजह को गुनहगार मानते हैं।

पर ऐसा बिल्कुल नहीं है

ये सब कोरा बकवास है,सिर्फ बहाना है

क्योंकि हमें तो ख्वाहिशों ने इतना जकड़ रखा है

कि हम लालची,दलाल और गुलाम बनते जा रहे हैं

जितना है उससे और ज्यादा पाने की ख्वाहिश

हर दम दौड़ते भागते रहते हैं,

भूखे भेड़िए की तरह हमारी भूख ही नहीं मिटती

हमारी तृष्णा की भूख कभी शांत ही नहीं होती।

खुश रहने की बात सोचने की फुर्सत 

जब हमें ही नहीं मिलती

तब बेचारी वजह ही आरोपों का शिकार बनती है।

खुश रहने के लिए वजह की नहीं

इच्छा शक्ति की जरुरत होती है

खुश रहने की चाह रखने वालों को

कांटों में भी खुशी मिल जाती है,

धन दौलत के भूखे भेड़ियों की भूख

श्मशान तक में नहीं मिटती है,

इसीलिए खुश रहने की वजह भी

सबके नसीब में नहीं होती है।

जो वजह ढूंढ़ने के बजाय खुश रहना चाहते हैं

वे तो हर हाल में खुश ही नहीं मस्त भी रहते हैं,

और जो समय सुविधा से खुश रहने की वजह ढूंढते हैं

वे सिर्फ झुनझुना बजाते हैं,

सिर्फ दौड़ते भागते रह जाते हैं

और खुशी से बहुत दूर रह जाते हैं। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract