फायकू- करुणा
फायकू- करुणा
फायकू- करुणा ******** करुणा का भाव लिए निहारती राह वो तुम्हारे लिए। आँसुओं को पीकर भी करुणा लुटाती रही तुम्हारे लिए। मार दिया ममता को पी लिया करुणा तुम्हारे लिए। अब सब व्यर्थ है करुणा संवेदना भी तुम्हारे लिए। कौन समझता है आज करुणा की भाषा तुम्हारे लिए। दबानी पड़ती है उसे करुणा का वेग तुम्हारे लिए। ऐसा कैसे हो सकता करुणा समझ नहीं तुम्हारे लिए। सुधीर श्रीवास्तव
