बुजुर्गों की अहमियत
बुजुर्गों की अहमियत
व्यंग्य - बुजुर्गों की अहमियत ********* आज बड़े बुजुर्गो को वो अहमियत नहीं मिलती जिसके वास्तव में वो हकदार हैं, शायद ये कलयुग का ही प्रभाव है। पर ऐसा केवल हम आप ही सोच सकते हैं क्योंकि हम आधुनिकता के रंग में रंगे जा रहे हैं, पर शायद हम यह भूल रहे हैं कि अपने लिए गड्ढे और खाईं खोद रहे हैं। जिस माँ बाप ने हमें पाल पोस कर बड़ा किया बड़े बुजुर्गों ने प्यार दुलार दिया, पढ़ाया, लिखाया, आज सफलता के इस मुकाम तक पहुँचाया। हमारी खुशी के अपनी खुशियों का गला घोंट दिया जाने कितने कष्ट झेले, खून पसीना सब एक कर दिया, पर हमारे लिए सब कुछ हँसकर सह लिया। आज जब हमारी, आपकी बारी है तब हम उन्हें अपमानित उपेक्षित करते हैं, उनके पास बैठकर दो चार बात तक भी नहीं करते हैं उनकी भावनाओं का गला घोंट देते हैं, उनकी बात सुनने के बजाय उन पर चिल्लाते हैं तीखे व्यंग्य बाण से उनका सीना छलनी कर देते हैं, अपनी आजादी की आड़ में उन्हें अकेला छोड़ देते हैं और तो और वृद्धाश्रम में भेजकर हाथ झाड़ लेते हैं, ऊपर से बुजुर्गों की अहमियत का बड़ा ज्ञान बघारते हैं शायद इसी तरह हम सब भारत रत्न का खिताब अपने नाम करना चाहते हैं, क्योंकि हम अपने बुजुर्गों को अहमियत छोड़िए भगवान से भी ज्यादा मान-सम्मान देकर सुबह शाम पूजा पाठ करते हैं, उनके नाम का जाप करते हैं। सुधीर श्रीवास्तव
