Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

अच्युतं केशवं

Drama Tragedy Inspirational


4  

अच्युतं केशवं

Drama Tragedy Inspirational


कल लुटेरे थे विदेशी अब लुटेरे हैं स्वदेशी

कल लुटेरे थे विदेशी अब लुटेरे हैं स्वदेशी

1 min 23 1 min 23

देशभक्ति आज बस इतिहास ही तो है

और सारा देश जिन्दा लाश ही तो है


कल लुटेरे थे विदेशी अब लुटेरे हैं स्वदेशी

शेष सारी कौम इनकी दास ही तो है


आजादी जम्हूरियत ये कोर्ट संसद या सभा

अशफाक़ का आजाद का उपहास ही तो है


स्वप्न का उद्देश्य का अपने भविष्यत का

देखते प्रत्यक्ष जो सब नाश ही तो है


कुछ राजनैतिक अश्व बाकी आप हम गदहे

अरु गधों के भाग्य में बस घास ही तो है


सीट पै मोदी हों बैठे याकि मनमोहन जनाब

आपकी किस्मत में भूख और प्यास ही तो है


बेटियों की आबरू तक को बचा पाये नहीं

क़ानून का शासन महज बकवास ही तो है


मैं भी हूँ मदहोश प्यारे आप भी मदहोश हैं

बात फिर तहजीब की परिहास ही तो है


देश में सूखा हो चाहे भुखमरी नदियों में बाढ़

कह रही सरकार जब मधुमास ही तो है


पन्द्रह अगस्त क्या है बताओ हाथ दिल पै रख हुजूर

एक झूठी जीत का अहसास ही तो है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from अच्युतं केशवं

Similar hindi poem from Drama