STORYMIRROR

Srishti

Drama Romance Classics

4  

Srishti

Drama Romance Classics

वो हमदम मेरा हमसे इश्क़ करता है

वो हमदम मेरा हमसे इश्क़ करता है

1 min
89

वो उन कश्मीर की वादिओं सा है

जहां शम्स भी दोपहर में धुँधला होता है


अर्श पर जिसके सिर्फ बादलों की सियासत होती है

जिसकी शाख पर मवाल खिलते हैं


जहां पूरी वादी ज़ाफ़रानी होती है

बर्फ की चादर ने यूँ ढाप रखा है उसे


के जो छू लो उसे तो सुकून सा लगे

उसकी कुर्बत में न होना जुर्म सा लगे


जहां रहने की तमन्ना हर मुसाफिर करता है

वो हमदम मेरा हमसे इश्क़ करता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama