STORYMIRROR

Chandramohan Kisku

Drama Tragedy

5  

Chandramohan Kisku

Drama Tragedy

बेटी भी माँ भी

बेटी भी माँ भी

1 min
247

घर में कुछ भी 

नहीं था 

चूहे कूद रहे थे 

भूख से 

और चूल्हा तो 

किसी राक्षस की तरह 

मुँह फाड़े बैठा था


घर में केवल था 

बेटी की गुल्लक  

जो बहुत हिफाजत के साथ 

रखी हुई थी

उसी के पैसे से 

वह खिलौना खरीदती  

लाल फीते से 

सजाती अपनी बाल


सुबह-शाम वह

हिलाती थी गुल्लक 

ख़ुशी से चूमती थी

सभी की नज़रों से 

दूर छुपाकर रखती थी


जब घर पर 

चूल्हा जला नहीं 

खाना पकाने के लिए 

पानी गर्म हुआ नहीं 

गरीबी नामक काला अँधेरा 

जब फैलने लगा चरों ओर

तब बेटी मेरी 


खिलौना भूल गई

लाल फीते से 

सजना भी भूल गई

याद किया केवल 

सफ़ेद फूलों जैसा भात

और परिवार के लोगों की 

शेर जैसी भूख 


वह जानती है 

खिलौना से भी 

खाना और प्राण

बड़ा होता है 

इसीलिए तो वह

मेरी बेटी भी है 

और माँ भी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama