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Vikas Shahi

Fantasy Children

3  

Vikas Shahi

Fantasy Children

नन्हे छात्र

नन्हे छात्र

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नन्ही नन्ही कोपल, 

हरे हरे पात हो गए। 

विद्या के घर में, 

चमन हरियाली छा गयी।। 


रास्तों में कूद-कूद, 

गलियारों में खेल-खेल। 

नन्ही-नन्ही क़दमों से, 

विद्या भूमि पावन हो गयी।। 


कक्षा की शरारत, 

पुस्तकों का बुरा हाल। 

चुपली-चुपली बातों में, 

गुरूजी का मन खो गया।। 


नन्ही सी उनकी लीला, 

नन्ही सी सौंदर्य वो। 

कुछ पल की ये किलकारियां, 

सदैव गुंजायमान हो गयी।। 


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