STORYMIRROR

Vikas Shahi

Abstract Inspirational

4  

Vikas Shahi

Abstract Inspirational

अधूरा इंसान

अधूरा इंसान

1 min
246

गहरी खाई में गिरा 

यूँ आहट सी लगी

फिर श्वासों के टूटने पर


कितना मजबूर होता

ये इंसान भी

उम्मीद के छूटने पर


घाव लगा अगाध

जो अपनों के तीर से

पीड़ा कहीं रूठने पर


बून्द बून्द आंसू से

समंदर भी भरा होगा

इंसानियत के मिटने पर।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract