मेरे हिस्से की धूप।
मेरे हिस्से की धूप।
सुनो मैंने अपने
हिस्से की धूप..
तुम्हारे नाम कर दी है..
अब तुम अपने ख्वाबों के
बीज अपनी आंखों में
बो सकती हो...
और अपनी साँसों
में तैरती ख़ुशबू भी
तुम्हारे नाम कर दी है...
अब तुम ये खुशबू
तुम्हारी देह के पोर
पोर में रमा सकती हो..!!

