STORYMIRROR

Gunjan Johari

Tragedy Others

4  

Gunjan Johari

Tragedy Others

क्यों नहीं

क्यों नहीं

1 min
400

भीड़ बहुत है यारा

रिश्तों की

सब अपने है

कहने को

पर इस भीड़ में भी

हर रिश्ता खड़ा

अकेला है

ढूंढते हैं कोई अपना

दो बात करने 

दिल की

नकली मुस्कान

नकली हंसी

लिए खड़े

अपनों के बीच

निभाते रिश्तों की

हर मर्यादा को

पर इन अपने

रिश्तों का क्या

अपने है अपनों

के दर्द से अनजान

क्यों है

असली और नकली

मुस्कान पहचानते

क्यों नहीं

दिल में छुपे अकेले पन

को पहचानते 

क्यों नहीं



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy