क्या खोया क्या पाया
क्या खोया क्या पाया
खुश हूँ कि गम और ख़ुशी का समन्वय ज़िन्दगी में मिला है
आखिर ये गम ही तो है जिसके कारण ख़ुशी का तख्तोताज शान से ऊंचा है।
खुश हूँ कि पल दर पल मुस्कुराहटों और आंसुओं का मिला जुला संगम मिला,
आखिर आंसू भी तो हृदय को उतनी ही राहत देते हैं जितना सुकून एक हंसी में होता है छिपा।
खुश हूँ कि ज़िन्दगी में तरह-तरह के लोग मिले, कुछ अच्छे तो कुछ ख़राब मिले,
अच्छे लोग बेहतरीन पलों का नज़राना तो ख़राब लोग जीवन के अनुभव दे गए।
खुश हूँ कि जीवन में अलग-अलग ख्वाब देखने को मिले,
कुछ टूट गए तो कुछ अगले ही पल जीवन की हकीकत बन गए,
आखिर इन्हीं ख़्वाबों ने तो जिंदगी को कभी रहस्यमयी,
तो कभी गुलज़ार बनाकर, उसमें नाना प्रकार के रंग भर दिए ।
खुश हूँ कि आँधियाँ कितनी भी आईं संकटों की, कदम कभी ना डगमगाए मेरे,
शायद दृण निश्चय और संकल्प की मिसाल दुनिया के समक्ष तभी ये छोड़ सके।
खुश हूँ कि ईश्वर द्वारा रचित और गठित एक अनोखी कृति, एक विचित्र रचना हूँ मैं,
और इसी एक एहसास के बलबूते ज़िन्दगी को बेधड़क, भली-भांति,
हर क्षण महसूस करती और जीती हूँ मैं।
