STORYMIRROR

कवि धरम सिंह मालवीय

Drama Others

4  

कवि धरम सिंह मालवीय

Drama Others

कविता

कविता

1 min
256

आते हैं पंछी पेड़ों पर और वो फिर उड़ जाते हैं

कौन बतायेगा अब उनको कितना हमें रुलाते हैं


खूब करे वो हास्य ठिठोली गीत प्यार के गाते हैं

गा गाकर वो गीत सुहाने हमको खूब रिझाते 

जब भर जाता हैं दिल तो छोड़ चले वो जाते हैं

जाते  जाते वो  इन नैनों में आँसू दे जाते 

जाने वाले तो जाते हैं पे कितना हमें सताते हैं

कौन बतायेगा अब उनको कितना हमें रुलाते हैं


साथ रहे वो खेले बैठे रिश्ता दिल का जोड़ दिया

समझ न पाए हम जीवन का रुख उसने मोड़ दिया

आस दिलाकर चाह की हमको प्यार धागा तोड़ दिया

क्या दस्तूर बना दुनिया का प्यार किया और छोड़ दिया

दिल के रिश्ते निभा न पाते दिल क्यूँ यार लगाते हैं

कौन बतायेगा अब उनको कितना हमें रुलाते हैं


बियाबान हो या मेला हो हम चैन कही न पाते हैं

कुछ भी याद नहीं रहता याद वो जब आ जाते हैं

दीवाने तो तन्हा रहते तन्हा ही रह जाते हैं

दीवानों का दुनिया में बस गम ही साथ निभाते हैं

जीवन में जो आये नहीं वो यादों में क्यूँ आते हैं

कौन बतायेगा अब उनको कितना हमें रुलाते हैं



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama