कीमत
कीमत
चीख,चिल्लाहट व रोना रोज सुनाई देता,
हाल ही में सीता ब्याह कर आयी थी यहाँ,
सुना माँग कर दहेज़ लिया ज़माने भर का,
एकाध बार सीता से हुआ आमना-सामना
उसने नमस्ते कहा,आँखों से लाचारी छुपा
आजकल पड़ोसियों से कहाँ होता राब्ता!
आज उसके घर से धुआँ निकलता देखा,
मुझे आभास हुआ है दाल में कुछ काला,
बाहर देखा तो मोहल्ला वहाँ जमा हो गया
फिर दहेज़ की बलि चढ़ गयी एक ब्याहता
रोज देखते सहमे मृग जैसी उसकी काया,
लालच रूपी नाग ने डसी फिर एक बाला।
गुजारिश मेरी सभी माँ-बाप ध्यान दें ज़रा,
जब शुरू हो जाये माँगने का सिलसिला,
कृपया अपनी बेटी की शादी ना करें वहाँ।
दहेज़ का लालच इंसां को मवेशी बनाता,
दौलत की अँधी चाह में सर्वस्व भूल जाता
प्रभु से डर लालची तेरे घर में भी बेटी देगा
यातना,प्रताड़ना का फल जरूर मिलता,
ध्यान दें दहेज़ माँगना,देना अपराध हैं बड़ा
जघन्य, क्रूर अपराध का जेल है ठिकाना।
