STORYMIRROR

Vihaan Srivastava

Tragedy

4  

Vihaan Srivastava

Tragedy

ख़ामोश लफ्ज़

ख़ामोश लफ्ज़

1 min
420

छलके हुए अश्रु से सवाल पूछ लो

ज़िन्दगी में ज़िन्दगी का हाल पूछ लों

एक वफा यकीन के काबिल नहीं लगे

हर दुआ में सब्र का मलाल पूछ लो


लोगों के हुजूम में गुमशुदगी मिले

आरजू एहसास में जब गुदगुदी मिले

थोड़ा सा ठहरों जरा कमाल पूछ लो

दिल के धड़कनों की गहरी चाल पूछ लो

छलके हुए...


आइना जब टूटकर दर्पण दिखाई दे

शोर में जब प्रीत के बस स्वर सुनाई दे

हो रहा है भाव क्यों विकराल पूछ लो

होठ हों ख़ामोश तो कपाल पूछ लो

छलके हुए...


मंजिलों में जब कभी हों रास्ते रुसवा

ख्वाबों की दहलीज की जब नींव हो तबाह

क्यों हुई बदहाल सालों साल पूछ लो

जिक्र में अपने मेरा ख्याल पूछ लो

छलके हुए...


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy