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Vihaan Srivastava

Abstract

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Vihaan Srivastava

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सड़कों में सन्नाटा है

सड़कों में सन्नाटा है

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कुदरत ने मानव जीवन को सुख व दुख में बांटा है

मानव की हिंसा नफरत से सड़कों में सन्नाटा है।


दुर्व्यसनो और बुरी लतों को ही मानव ने छाटा है

मानव की हिंसा नफरत से सड़कों में सन्नाटा है।


स्त्री संग बलात्कार हुए सम्पूर्ण जगत पे चाटा है।

मानव की हिंसा नफरत से सड़कों में सन्नाटा है


बलि और कुछ स्वाद के खातिर जीव जंतु को काटा है

मानव की हिंसा नफरत से सड़कों में सन्नाटा है।


चोरी और डकैती से लोगों का हुए घाटा है

मानव की हिंसा नफरत से सड़कों में सन्नाटा है।


उपद्रवों और दंगो से शांति शिष्टता टाटा है

मानव की हिंसा नफरत से सड़कों में !


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