STORYMIRROR

Vihaan Srivastava

Inspirational

2  

Vihaan Srivastava

Inspirational

इज्जत ख़ातिर ईश

इज्जत ख़ातिर ईश

1 min
59

राजा के घर जन्म हैं लेते, इज्जत ख़ातिर ईश 

साधु भी है वही ठहरता, जहां तो झुका शीश 

गुरुजन भी सम्मान में देते, भर भर कर आशीष 

बेइज्जती में न देवता रुकते, न रुकते गिरीश 


आंखों में आंसू भर लो या तो लो सारे पाप 

ईश्वर को बस दिखा सदा हैं कितने सच्चे आप 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational