STORYMIRROR

Vihaan Srivastava

Inspirational

3  

Vihaan Srivastava

Inspirational

इज्जत ख़ातिर ईश

इज्जत ख़ातिर ईश

1 min
223

राजा के घर ही जन्म हैं लेते ,इज्जत ख़ातिर ईश 

साधु भी है वही ठहरता, जहां हों झुकते शीश 

गुरुजन भी सम्मान में देते ,भर भर के आशीष 

बेइज्जती में न देंव रुकें , ऋषि और न गिरीश ।।


आंखों में आसूं भर लो ,या धो लो सारे पाप 

ईश्वर को दिखे सदा, कितने सच्चें हैं आप 

रूह नही छिप सकती है, पोत लो चाहे ग्रीस 

राजा के घर ही जन्म हैं लेतें , इज्जत ख़ातिर ईश ।।


मन में छल व कपट रवां, क्यो छिड़क रहे हो भांग 

अव्वल है वो लीलाओं में, समझे तेरे स्वांग

पता नही चढावों में, भरोगो कितनी फीस

राजा के घर जन्म है लेतें, इज्जत ख़ातिर ईश।।


दोगलों और ढोंगी संग हरगिज़, नही टिकते भगवान

स्वार्थ सिद्धि में रहना मत, तू है एक इंसान 

सच्चाई के दम से ही ,नतमस्तक रवीश

राजा के घर जन्म है है लेते, इज्जत ख़ातिर ईश।।


ईश्वर भी तेरी फ़ितरत में ,हो जाएगा मौन

जब तू खुद को बनाके, पूछेगा मै आखिर कौन 

तुझको ही फिर देखेगा, चार हों या चालीस

राजा के घर जन्म है लेते, इज्जत ख़ातिर ईश ।।


भक्ति और भाव में ,ईश्वर का न दिखता अंश

रोने और तड़पनें में ,तू ले डूबेगा वंश 

शौर्यवान और सच्चो से ही, मिलते है जगदीश 

राजा के घर जन्म है लेते, इज्जत ख़ातिर ईश।। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational