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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"धूम्रपान छोड़ दो"

"धूम्रपान छोड़ दो"

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इस धूम्रपान को आप छोड़ दो

कैंसर की विषैली टांग तोड़ दो

घर पर बच्चे,मां-बाप है,तुम्हारे

स्वयं को एक जिंदगी ओर दो


दरिया में चलती,बस वही नाव

जिसके भीतर न हो,कोई घाव

जिंदगी को जिंदगी की मौज दो

इस धूम्रपान को तलाक रोज दो


इस धूम्रपान को आप छोड़ दो

इस धूम्रपान को कभी न वोट दो

इस जिंदगी को जिंदगी से जोड़ दो

इसका कभी न फेफड़ों को भोज दो


धूम्रपान रूपी आत्महत्या छोड़ दो

खुद को नही वक्त से पहले मौत दो

गुटखा,बीड़ी,सिगरेट,खैनी,तम्बाकू

सबके सब नशों को,तुम छोड़ दो


साँसों को न व्यर्थ का बोझ दो

इस धूम्रपान को आप छोड़ दो

जीवन को जीवन ओर मोड़ दो

धूम्रपान को मजबूती से रोक दो


प्रतिवर्ष इससे होती लाखों मौते

फिर भी हम सुधरने को न होते

सरकार को अब आप बोल दो

सटीकता से इस पर रोकटोक दो।


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