ज्योति किरण
Horror Tragedy Thriller
भगवान् भी ये देख कर के कितना डर गया।
बनाया तो इंसान था, मगर क्या बन गया !
छोटी-छोटी बच्चियों को नोचते हैं जो
वो आदमी नही है, जानवर है बन गया।।
आँख में भी लाज-शरम बाकी ना रही
इंसानियत की आँख का पानी जो मर गया।।
तेरा आना
धड़कनों की धु...
चिरपरिचित याद...
लम्हें जिंदगी...
मेरी दुनिया
अग्निफेरा
पिता
हमनवां
दर्द से रिश़्...
दीदार
कोई किसी को क्या दे दिलासा, कैसे पोंछे आंसू हाथ बंधे हुए, हर कोई बेबस, लाचार, उदास कोई किसी को क्या दे दिलासा, कैसे पोंछे आंसू हाथ बंधे हुए, हर कोई बेबस, लाचार...
अपने प्राणों को समेटे कुछ बूढ़े अपने कभी न लौटने वाले युवा बेटों का इंतजार करते अपने प्राणों को समेटे कुछ बूढ़े अपने कभी न लौटने वाले युवा बेटों का इ...
मिट्टी पे हैं पदचिह्न दिखे कई, पर चलने वाला दिखे नहीं। मिट्टी पे हैं पदचिह्न दिखे कई, पर चलने वाला दिखे नहीं।
नथुनों में दुर्गंध फ़ैली है लहू हर ओर जो बिखरा है नथुनों में दुर्गंध फ़ैली है लहू हर ओर जो बिखरा है
चिड़ियों के रैन-बसेरे भी काट लिया उड़ान को ना छोड़ा आसमान खाली। चिड़ियों के रैन-बसेरे भी काट लिया उड़ान को ना छोड़ा आसमान खाली।
परवाह सँग दे वो हौसला उपहारी कोई अरदास है। परवाह सँग दे वो हौसला उपहारी कोई अरदास है।
उसने उसने आजू-बाजू देखा पर उसे कोई नजर नहीं आया कैमरा लेकर राजीव के पास गई। उसने उसने आजू-बाजू देखा पर उसे कोई नजर नहीं आया कैमरा लेकर राजीव के पास गई।
हृदय विदारक है तेजाबी हमला, हाय कैसे इसके क्रूर दंश से बचे अबला ? हृदय विदारक है तेजाबी हमला, हाय कैसे इसके क्रूर दंश से बचे अबला ?
क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है? क्या वह साया सचमुच यहाँ है, या यह सिर्फ एक ख्याल है?
सब तरफ से टूट पड़े हैं राक्षस, करते अत्याचार न खिल सकते, न जी सकते ये दुविधा बड़ सब तरफ से टूट पड़े हैं राक्षस, करते अत्याचार न खिल सकते, न जी सकते ...
त्रेता में श्रीराम तब आये थे, त्रेता में श्रीराम तब आये थे,
फ़्लैट और क्लब हो सब जगह दिखेंगे भूत डरना होगा अब इंसान को। फ़्लैट और क्लब हो सब जगह दिखेंगे भूत डरना होगा अब इंसान को।
यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है कभी अम्मी जैसा ख़्वाब ... यह नज़ारा देख रही औरत की नन्ही बच्ची सबक ले रही है और मन ही मन तय कर रही है क...
हवा की सरसराहट के बीच, कुछ आवाज़ बाहर से थी आई तन ठिठुरा, हाथ कांपते, फिर मैंने भी एक हवा की सरसराहट के बीच, कुछ आवाज़ बाहर से थी आई तन ठिठुरा, हाथ कांपते, फिर मैं...
वो बूंदें कैसी थी जिन पर दर्पण भी शोक मनाता है, वो बूंदें कैसी थी जिन पर दर्पण भी शोक मनाता है,
जाने क्यों वो अनसुलझा-सा रहस्य मुझे डराने लगा I जाने क्यों वो अनसुलझा-सा रहस्य मुझे डराने लगा I
थी तो वो रात अमावस पर दिल में पूरा चाँद खिला। एक बड़ा जरुरी सबक था जो मुझको आज मिला। थी तो वो रात अमावस पर दिल में पूरा चाँद खिला। एक बड़ा जरुरी सबक था जो मुझको आज...
जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं। जल कर खाक हुई, आवाज़ें कहाँ से अब तक आती हैं।
बातें बहुत बिगड़ गई है। इन्हें नहीं ठीक किया जा सकता। बातें बहुत बिगड़ गई है। इन्हें नहीं ठीक किया जा सकता।
यह क्या सिर चकराया क्या हम भी उनमें से एक हुये, बताओ सबको क्या लगता है जिंदा हैं या... यह क्या सिर चकराया क्या हम भी उनमें से एक हुये, बताओ सबको क्या लगता है जिंदा ...