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ज्योति किरण

Horror Tragedy Thriller

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ज्योति किरण

Horror Tragedy Thriller

इंसानियत

इंसानियत

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भगवान् भी ये देख कर के कितना डर गया।

बनाया तो इंसान था, मगर क्या बन गया !


छोटी-छोटी बच्चियों को नोचते हैं जो

वो आदमी नही है, जानवर है बन गया।। 


आँख में भी लाज-शरम बाकी ना रही

इंसानियत की आँख का पानी जो मर गया।। 


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