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ज्योति किरण

Romance Tragedy Classics


4.5  

ज्योति किरण

Romance Tragedy Classics


दर्द से रिश़्ता पुराना हो गया

दर्द से रिश़्ता पुराना हो गया

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दर्द से रिश़्ता पुराना हो गया।

मुस्कुराये भी ज़माना हो गया।।


जिस घड़ी टकरा गई उनसे नज़र_

उस घड़ी ये दिल रवाना हो गया।।


पास उनके, दूर ख़ुद से हो गये_

ख़ूब उल्फ़त का बहाना हो गया।।


गुनगुनाती है अधूरी आरज़ू _

साँस की लय से तराना हो गया।।


अश्क़ आँखों से कभी छुपते नहीं_

एक किस्सा था, फ़साना हो गया।।


धड़कनों ने की सभी ग़ुस्ताख़ियाँ_

बेवजह ही दिल दीवाना हो गया।।


कुछ हमारी भी सुनो ऐ ज़िन्दगी_

अब सितम ये आज़माना हो गया।।


क्या कहे, क्या ना कहे ज्योतिकिरण_

इश्क़ नादाँ था सयाना हो गया।।

           


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