Ravidutt Mohta
Drama
पिता में
हिचकी सी
रह जाती है
बेटियाँ !
बड़ी होकर
बस
इतनी -सी
ठोकर
कुछ नहीं होता
मैं संन्यास ल...
मैं सचमुच कुछ...
कत्ल से भरी य...
होंठ मेरे कित...
अंगूठी
हिचकी
वे दो बांहें
आत्मा
लहरों के बीच अपनी कश्ती में किनारे से दूर बैठा हूँ...। लहरों के बीच अपनी कश्ती में किनारे से दूर बैठा हूँ...।
बादलों की तरह कल फिर आओगे शायद इस गलतफहमी में थे बादलों की तरह कल फिर आओगे शायद इस गलतफहमी में थे
लोग स्वार्थ के लिये निभाते रिश्ते चार है। लहू-रिश्ते में भी क्या ख़ूब पानी की बहार है। लोग स्वार्थ के लिये निभाते रिश्ते चार है। लहू-रिश्ते में भी क्या ख़ूब पानी की ...
दे दे इतनी - सी रोशनी कि दिल का अंधेरा दूर कर सकूं मैं कोई टूटी हुई उम्मीद अभी भी जैसे कायम है दे दे इतनी - सी रोशनी कि दिल का अंधेरा दूर कर सकूं मैं कोई टूटी हुई उम्मीद अ...
हाँ कोमल हूं मैं फूल सी और एक पंख सी नाजुक हूँ पर नाम आए परिवार का तो सबसे लड़ जाती है हाँ कोमल हूं मैं फूल सी और एक पंख सी नाजुक हूँ पर नाम आए परिवार का तो सबसे लड़...
बिलखती है ख़ामोशी चीख़ता है सन्नाटा पालनकर्ता माँग रहा है दो रोटी का आटा...! बिलखती है ख़ामोशी चीख़ता है सन्नाटा पालनकर्ता माँग रहा है दो रोटी का आटा...!
जहाँ झुकी पलकों के सायों तले और बेमन सी मुस्कान पर लोग रीझ जाते जहाँ झुकी पलकों के सायों तले और बेमन सी मुस्कान पर लोग रीझ जाते
जैसे आधार नंबर मात्र एक डेटा है.... एक शरीर का...एक वोट का.... जैसे आधार नंबर मात्र एक डेटा है.... एक शरीर का...एक वोट का....
एहसासों की हत्या कर, सब कुछ पराया करना, एहसासों की हत्या कर, सब कुछ पराया करना,
आकर ख़्वाबों में यूँ रोज-रोज तूम.. और इस दिल को बेक़रार न कर आकर ख़्वाबों में यूँ रोज-रोज तूम.. और इस दिल को बेक़रार न कर
अंदर और बाहर एक जैसे ही चेहरे है, हमारे पर इंसानी फ़ितरतों से गर्दिश में है, अंदर और बाहर एक जैसे ही चेहरे है, हमारे पर इंसानी फ़ितरतों से गर्दिश में है,
दीपक भी बन गया तम स्तोत्र है हर ओर आज निशाचरों का जोर है दीपक भी बन गया तम स्तोत्र है हर ओर आज निशाचरों का जोर है
कोख की कोठरी से उसकी चीख बेहोश माँ भी न सुन सकी कोख की कोठरी से उसकी चीख बेहोश माँ भी न सुन सकी
मजबूरी में करते काम, अशिक्षा का है परिणाम ! मजबूरी में करते काम, अशिक्षा का है परिणाम !
किस शांति की तलाश में घाट घाट भटकता है हूं ये कैसा योगी मैं और किस योग में हूं मगन किस शांति की तलाश में घाट घाट भटकता है हूं ये कैसा योगी मैं और किस योग में हू...
होंठों की जगह आंखों से निकल, न जाने कहां धुआं-धुआं हो जाती है। होंठों की जगह आंखों से निकल, न जाने कहां धुआं-धुआं हो जाती है।
दिल के आँगन ये स्वर्ण सी किरणें बिखर जाती जब हर कोने में दिल के आँगन ये स्वर्ण सी किरणें बिखर जाती जब हर कोने में
एक जीत पाने के लिए, कई हार साथ होती है ! एक जीत पाने के लिए, कई हार साथ होती है !
कभी जरा सी हवा चली तो बिखर जाता है सपनों का महल l कभी जरा सी हवा चली तो बिखर जाता है सपनों का महल l
ऊंचे पहाड़ों के ठंडे दर्द अपनी पुकार से बांध लेते है ऊंचे पहाड़ों के ठंडे दर्द अपनी पुकार से बांध लेते है