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कत्ल से भरी ये दुनिया

कत्ल से भरी ये दुनिया

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मैं उन दोनों से मिला

दोनों ने शादी पहन रखी थी

उस लड़की से मिला

वो प्यार पहने घूम रही थी

कल वो दोस्त मिला

उसने दोस्ती पहन रखी थी

कुछ परिवार ऐसे भी थे

जिन्होने पहन रखे थे

अपने माता-पिता ...


और तो और

यहाँ तक हुआ

कुछ देशों ने तो

संसद तक पहन रखी थी


देख रहा हूँ

किसी ने बच्चे पहन रखे है

किसी ने पहन रखा है देश

कोई ताबूत पहने घूम रहा है

तो कोई कत्ल ही साबूत पहने धमका रहा है


ये पहनने वाले

जब चाहे जो पहन लेते है

और कुछ भी उतार देते है


जैसे ...

आज कल बेटों ने

माँ-बाप उतार दिए है

नवविवाहित लड़कियां

शादियाँ उतार रही है

दोस्तों ने मित्रता उतार दी है

शहरों ने हमदर्दी उतार दी है


कौन कब -क्या पहन ले

और क्या उतार दे

कुछ पता नहीं चलता है

दीवारें उतार रही है

माँ-बाप की तस्वीरें

और

घरों ने अपनी-अपनी

छतें उतार दी है


किसी ने पहन रखी है

पैंट की जगह जेब

तो कोई पहने घूम रहा है

बूट और बटुआ

कहीं कुछ लोग तो पहने घूम रहें है

पूरा का पूरा बाजार


लग रहा है जैसे

पूरी दुनिया घूम रही है

पहने पेट अपना- अपना


इधर कुछ लोग शरीर उतार रहें है

पर रोटियाँ पहन रहें है

लड़के पहन रहे है लड़कियां

और बेचारे बूढ़े गालियां पहन रहें है

लोगों ने अपनी-अपनी सुबह उतार दी है

और एक-दूसरे की रात पहन ली है


इस नंगी हो रही दुनिया में

कुछ भी कहना अब मुश्किल है

अब तो बस यहाँ रहना भी मुश्किल है


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