Ravidutt Mohta
Tragedy
औरत
सारी उम्र
पहने रहती है
एक उँगली में
पूरी शादी
उसकी कलाइयाँ
भर दी जाती है
चूड़ियों से
नारी देह का
कोई अंग नहीं छोड़ा
पुरुष ने
अपनी हवस मिटाने को
यहां तक कोख भी
उसकी
पुरुष भर देता है
अपनी हवस से
बेचारी औरत
सारी उम्र रह जाती है
तरसती
एक पुरुष को।
ठोकर
कुछ नहीं होता
मैं संन्यास ल...
मैं सचमुच कुछ...
कत्ल से भरी य...
होंठ मेरे कित...
अंगूठी
हिचकी
वे दो बांहें
आत्मा
तन मन धन समर्पित करता वो संघर्ष बाँट तक नहीं पाता है। तन मन धन समर्पित करता वो संघर्ष बाँट तक नहीं पाता है।
मेरे अनसुने, अनकहे ख्यालों में देवलोक से इक नन्ही परी उत्तरी थी कल । मेरे अनसुने, अनकहे ख्यालों में देवलोक से इक नन्ही परी उत्तरी थी कल ।
सभी योद्धाओं का हृदय से आभार नायकों के इस इरादों को सलाम। सभी योद्धाओं का हृदय से आभार नायकों के इस इरादों को सलाम।
सैनिटाइजर से खुद को बचाए रखिए कोरोना से... सैनिटाइजर से खुद को बचाए रखिए कोरोना से...
बस रेंगते रेंगते जीवन अपना जीता फिर मिट्टी में ही जा मिल जाता। बस रेंगते रेंगते जीवन अपना जीता फिर मिट्टी में ही जा मिल जाता।
कोई सुबह तो आशाओं की मनहूस सी ये रात फिर ना हो। कोई सुबह तो आशाओं की मनहूस सी ये रात फिर ना हो।
सहर्ष उसे सह जाऊंगा दुनिया से फिर नाता तोड़ के तुझमें फ़ना हो जाऊंगा। सहर्ष उसे सह जाऊंगा दुनिया से फिर नाता तोड़ के तुझमें फ़ना हो जाऊंगा।
न ही पड़ी किरचें और ना जुड़ पाया फिर टूटा हुआ है दर्पण मेरे दिल का आज भी। न ही पड़ी किरचें और ना जुड़ पाया फिर टूटा हुआ है दर्पण मेरे दिल का आज भी।
कर्ण जैसी दोस्ती हुई आज बेघर है कर्ण जैसी दोस्ती हुई आज बेघर है
गरीबी इंसान को लाचार बना देती है.... जो दिन ना देखे वो सब दिखाती है। गरीबी इंसान को लाचार बना देती है.... जो दिन ना देखे वो सब दिखाती है।
फटी जेब से निकालकर, बच्चे की तस्वीर देखता है। फटी जेब से निकालकर, बच्चे की तस्वीर देखता है।
और हो जाए उसकी दिहाड़ी, ज्यादा नहीं मिला तो वह गुड़ खा कर ही पी लेता है पानी। और हो जाए उसकी दिहाड़ी, ज्यादा नहीं मिला तो वह गुड़ खा कर ही पी लेता है पानी।
हकीकत से परे जीने का अपना अंजाम देखती है। हकीकत से परे जीने का अपना अंजाम देखती है।
बच्चे भूख से मर रहे है, दवा दारू को तरस रहे हैं। बच्चे भूख से मर रहे है, दवा दारू को तरस रहे हैं।
कि हम अपने आप से ही डर रहे हैं और मुंह छुपा कर घबरा कर भागना चाहते हैं। कि हम अपने आप से ही डर रहे हैं और मुंह छुपा कर घबरा कर भागना चाहते हैं।
बंट गई है जो टुकड़ों में ये जिंदगी मेरी अब उसे खुद हम समेट रहे हैं। बंट गई है जो टुकड़ों में ये जिंदगी मेरी अब उसे खुद हम समेट रहे हैं।
वक्त दूर है देर से आएगा मगर आएगा दुरुस्त। जब तुम बात करोगे।। जब तुम बात करोगे।। वक्त दूर है देर से आएगा मगर आएगा दुरुस्त। जब तुम बात करोगे।। जब तुम बात कर...
हर परिस्थिति में तुमने बढ़ाया देश का मान है ऐ सफेद वर्दी वाले तुझे बारंबार सलाम है। हर परिस्थिति में तुमने बढ़ाया देश का मान है ऐ सफेद वर्दी वाले तुझे बारंबार सल...
न हो दुखी ले लो जो भी किस्मत से मिले, किसी को मिले पूरा तो किसी को आधा टुकड़ा मिले। न हो दुखी ले लो जो भी किस्मत से मिले, किसी को मिले पूरा तो किसी को आधा टुकड़...
भटकना पड़ता है दर-दर निवाले के लिए, और सुस्ताने को भी नहीं मिलता कोई मचान। भटकना पड़ता है दर-दर निवाले के लिए, और सुस्ताने को भी नहीं मिलता कोई मचान।