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कवि हरि शंकर गोयल

Tragedy


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कवि हरि शंकर गोयल

Tragedy


कमला

कमला

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एक नहीं अनेक कमला देवी हैं

यहां किस किस कमला देवी की बात करें 

एक कमला दिन भर खटती है खेत में 

घर का सारा काम भी वही करती है 

सुख क्या होता है , उसने उसे देखा नहीं

काम से फुर्सत मिले तभी तो देख पाये ?


दूसरी कमला देवी "बेलदारी" करती है 

उसका पति भी वहीं "चिनाई" करता है 

एक छोटे से बच्चे को साथ ले जाती है 

वह पत्थर, ईंट, बजरी में खेलता रहता है 

दिन उगने से पहले ही वह जाग जाती है

और देर रात तक रोज खटती रहती है 

सुख की किरणें अभी आई नहीं हैं उसके घर

पर एक दिन जरूर आयेंगी, कब तक बचेंगी ?


एक कमला देवी दूसरे के घरों में काम करती है

झाड़ू-पोछा, बर्तन, कपड़े सब साफ़ करती है 

खुद का घर कभी कभी गंदा ही रह जाता है 

रात को शराबी पति के हाथों रोज पिटती भी है 

बच्चे इसी माहौल में बड़े होते हैं उसके 

उनके सामने ही वह खून का घूंट पीती रहती है 

सुख की बहारें अभी तक नहीं पहुंची हैं उस तक 

क्या शराबी पति के रहते वे हिम्मत कर पाएंगी 

 

एक कमला देवी "धंधा" करती है 

पेट पालने का बस यही एक जरिया है 

अपने जुआरी पति को भी पालना है उसको 

उसी ने तो उसे वहां "धंधे" पर बैठाया था 

तिल तिल करके रोज मरती है वह 

फिर भी परिवार का फर्ज अदा करती है वह 

उससे अधिक दुखी और कौन होगा, भला ? 


एक कमला देवी गृहणी है 

दिन भर पति की बक बक सुनती है 

बच्चे भी उसे ऊटपटांग कहते रहते हैं 

सबके लिए वह कुछ न कुछ लाती है 

मगर अपने लिए "कंजूसी" ही करती है 

फिर भी वह "फिजूलखर्ची" कहलाती है 

इसी उम्मीद में जीती है वह प्रतिदिन 

कि कभी तो उसको समझेगा "कोई" 

और शायद उस दिन सुख का सागर आ जाये ? 


एक कमला देवी किसी वृद्धाश्रम में रहती है 

कभी उसका भी कोई मकान होता था 

जिसे उसी के बेटे बहू ने अब हड़प लिया है 

छोड़ दिया है उसे दर दर की ठोकरें खाने को 

अब सोचती है कि काश, उसने बेटी "जनी" होती 

कम से कम ये दिन तो नहीं देखने पड़ते ? 


एक कमला देवी मर गई थी 

सुना है कि ससुराल वालों ने जला दी थी 

कह रहे थे कि दहेज बहुत कम लाई थी 

इसलिए उसकी भरपाई दूसरी "कमला" से करेंगे 

दूसरी "कमला" सब कुछ जानकर भी 

कर लेती है उस "हत्यारे" से विवाह 

और प्रोत्साहित करती है उस कुत्सित प्रवृत्ति को 

हालांकि वह भी जीवन भर दुखी रहती है 

लोभियों के घरों में कभी सुख देखा है क्या ? 


एक और कमला देवी को मैं जानता हूं 

बेटे की आस में बेटियां पैदा कर रही है 

सुना है कि इस बार भी उसके पैर "भारी" हैं 

वह खुद "लिंग परीक्षण" का दबाव डाल रही है 

अबकी बार उसे बेटी नहीं चाहिए 

किसी भी कीमत पर मतलब किसी भी कीमत पर

क्या ऐसे घर में सुख आने की हिम्मत करेगा ? 


एक कमला देवी ने हंगामा कर रखा है 

ससुराल वालों की नाक में नकेल कस रखा है 

रोज रोज नई नई कोई धमकी देती है 

सबको "अंदर" कराने की बात कहती है 

दिन भर अपनी मां से बतियाती रहती है 

मां भी बेटी को यही सब समझाती रहती है 

रिश्तों की डोर बस अब टूटने ही वाली है 

फिर आप ही बताओ क्या वो "भाग्यशाली" है ? 


और भी बहुत सी कमला देवी रहती हैं यहां 

किस किस की दास्तां आपको मैं करूं बयां 

कोई वक्त की मारी हुई है

तो किसी ने खुद अपने पैरों पे कुल्हाड़ी चलाई है 

कोई प्रेमी के साथ भाग खड़ी हुई 

तो किसी ने पति की लाश ठिकाने लगाई है 

कुछ ने अपने कर्मों और व्यवहार से 

इस जीवन को जन्नत बना रखा है 

अपने पति की प्रिया बनकर राज कर रहीं हैं 

और परिवार में भी आदर सम्मान कमा रखा है 

यहां पर सुख ने अपना स्थाई डेरा डाल रखा है. 




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