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मिली साहा

Romance Tragedy

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मिली साहा

Romance Tragedy

गलियाँ उन बीते पलों की

गलियाँ उन बीते पलों की

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आज भी है मेरे इस दिल में बसी कहीं,

गलियाँ उन बीते हुए सुनहरे पलों की,


जो हर लम्हा मोहब्बत की खुशबू लिए,

एक आस जगाती है तुम से मिलन की,


बीती बातों में ढूँढता दिल अक्सर तुम्हें,

वीरानी में भी महक आती है बहार की,


गुजरते लम्हे खूबसूरत ख़्वाबों की तरह,

जहन में बसकर तस्वीर बनती यादों की,


सोता हूँ तेरी यादों को मैं अपने सिरहाने रख कर,

मुरझाती नहीं कभी दिल में कसक तेरी यादों की,


रोशन रहेगा मेरे इस दिल में, तेरी यादों का चिराग,

अश्कों ने तो कोशिश की कई बार इसे बुझाने की,


तेरी यादें अक्सर रुला जाती हैं इन आँखों को, पर,

तेरा वो मुस्कुराना, आज भी वज़ह है मेरे जीने की,


खड़ा हूँ आज भी वहीं उन्हीं राहों पे तेरे इंतजार में,

जहाँ गवाह हैं फिजाएं भी बीते उन हसीन पलों की,


यादें तो हैं तेरी पर तू नहीं, ज़िन्दगी की महफ़िल में,

तुझ बिन अजनबी लगती आवाज़ भी इन साँसों की,


कभी हवा तो कभी मेरी आँखों का पानी बनकर तू,

ख़ामोशी में अक्सर बारिश किया करती है बातों की,


कल-कल बहती नदी सी तेरी यादें, ख़्वाबों, ख्यालों में,

अक्सर तड़पाती मुझे खामोशियाँ बन जाती रातों की,


काश! कि हम बिछड़े ना होते, सफ़र में तन्हा ना होते,

तो बात कुछ और होती, मोहब्बत की इन गलियों की।


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