STORYMIRROR

एहसास

एहसास

1 min
341


कभी खुद को मैंने देखा नहीं कभी पहचाना नहीं

हूँ परेशान मैं या नहीं यह तो कभी जाना नहीं।


अपनी हालत का बला कब कैसे एहसास होता

किसी कोने मे रखा मैंने कभी कोई आईना नहीं।


गम की नुमाइश करे यह सलीका कभी सीखा नहीं

रखी गुफ्तगू मुख़्तसर जानते थे साथ देगा ज़माना नहीं।


शिद्दत से हमने खूब निभाई हर मुकाम पर

ए वफ़ादारी तेरे मापने का कोई पैमाना नहीं।


आज तकलीफें दरकिनार एहसास ज़िंदा हो गया

मतलब के रिश्ते खूब हुए मतलबी रिश्ते निभाना नहीं।


ए दिल तू ज़िंदा न मर ज़िन्दगी है अमानत ऊपर वाले की

दुनिया चाहे पत्थर हो जाये कभी खुद को पत्थर बनाना नहीं।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama