STORYMIRROR

Ratna Kaul Bhardwaj

Classics Inspirational

4  

Ratna Kaul Bhardwaj

Classics Inspirational

दिल का कर्ज़

दिल का कर्ज़

1 min
10

 गमों को दांतों तले चबाया
लबों को थोड़ा सा फैलाया
उम्मीदों के चराग जलाकर
मैने दिल का कर्ज़ चुकाया

 दिल को एक वजह दीजिए
हरकतें इसकी नाज़ुक है
अपनेपन की एक झलक से
रोते हुए भी यह मुसकाया

 दिल की गहरी खामोशी में
 खामोश सी तड़प होती है
धड़कनों को रोक कर
बढ़ों बढ़ों को इसने रुलाया

 दिल के तारों को छेड़ना
मानो अंगारों से खेलना
इसमें डूबकर जिसने देखा
समुद्र से गहरा इसको पाया

 हम भी एक मुसाफिर हैं
 राहों में पत्थर बिछे मिले
जब जब हम हताश हुए
दिल ने अपना हाथ थमाया

 उम्मीदों के चराग जलाकर
 मैने दिल का कर्ज़ चुकाया....

 ✍🏼रतना कौल भारद्वाज


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics