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Amit Singhal "Aseemit"

Drama Tragedy Classics

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Amit Singhal "Aseemit"

Drama Tragedy Classics

धूल भरी क़िताब

धूल भरी क़िताब

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जिसमें लिखे थे मैंने अपने किस्से, ख़्याल और ख़्वाब।

समय की करवट ने बना दिया उसे धूल भरी क़िताब।


रोज़ उस क़िताब में एक एक शब्द का मोती पिरोता।

उन मोतियों की एक सुंदर माला बनाकर मैं संजोता।


उस प्यारी सी क़िताब में मैंने लिखे दिल के जज़्बात।

बस वही एक तो मेरी साथी बनी थी दिन हो या रात।


मशरूफ़ हो गया और वक्त के हाथों मजबूर हो गया।

उस क़िताब के पन्नों में लिखे हालातों से दूर हो गया।


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