STORYMIRROR

Taj Mohammad

Tragedy

4  

Taj Mohammad

Tragedy

छलक कर अश्कनज़रों से।

छलक कर अश्कनज़रों से।

1 min
419

क्या गरीब क्या अमीर जीवन हर किसी का ना होता।

होता है यह उसी का बस जो इसे मस्त मौला सा जीया ।।1।।


भूख की तड़प क्या होती है यह उसको नहीं पता।

जा कर पूँछों उस गरीब से जिसे यह दो दिन से ना मिला ।।2।।


यूँ मरने से पहले तुमको सोचना था इक बार उनका।

औलाद का गम माँ-बाप से ज्यादा किसी को ना पता ।।3।।


कोई जाकर जरा समझे दे उनको रिश्तों को निभाना।

यूँ लड़ना बेवजह हर वक्त मसले का हल होता ना सदा ।।4।।


यह तड़प है रूहें इश्क की तुमको इसका कुछ ना पता।

दर्द इसका वही जाने जिसने इसको सह कर हो जिया ।।5।।


छलक कर अश्क नज़रों से खुद ब खुद ही गिर जाते है।

जब कोई अपना रूह को देता है बस घाव पर घाव बड़ा ।।6।।


कभी ना कभी हर इंसान ही दो राहे पर होता है खड़ा।

जाये तो जाये किस सम्त वह यह उसको होता ना पता ।।7।।


आ गया उनका इश्क़ देखो अब अलग होने के मोड़ पर।

कोई क्या जानें इस रिश्ते में किसकी कितनी सी है ख़ता ।।8।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy