STORYMIRROR

कवी श्रेयस

Tragedy

3  

कवी श्रेयस

Tragedy

रंजिश ही सही दिल ही

रंजिश ही सही दिल ही

1 min
145


कूछ तो मेरे मोहब्बत का हिसाब रख

कभी तो मुझ को मनाने के लिये आजा 


पहले से मुझे हंसाने न सही रुलाने के लिये तो आजा 

इस दुनिया की रस्मे निभाने के लिये आजा 


किस किस को बताऊं अब इस जुदाई का सबब

मुझसे खफा है तो मेरे लिये ना सही इस दुनिया के लिये आजा 


बहुत दिनो से राह तक्ता रहा हूं ए महरुम

अब इस दर्द ए दिल को राहत ही सही दिलाने आजा 


कूछ उम्मीदें हैं अभी भी जली जिंदा है रक्ते ए दर्द दिल मे 

ओ आंख्री उम्मीदें ही सही उम्मीदें दीप बुझाने के लिये आजा। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy