STORYMIRROR

कवी श्रेयस

Tragedy Others

4  

कवी श्रेयस

Tragedy Others

मिलना था इत्तिफ़ाक़

मिलना था इत्तिफ़ाक़

1 min
266

मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था

वो उतनी दूर हो गया जितना दिल के करीब था


उसकी यादों का आना दिल का दस्तूर था

आकर मुझे यूं ही तिल तिल तड़पाना एक फितूर था


टूटकर भी उसको चाहना मेरा बस गुनाह था

दिल था उसका क्या कसूर था


ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे आज रोना आया था

जाने क्यों तेरे नाम पे रोना आया था

 

 कभी तक़दीर का मातम कभी दुनिया का गिला था

 अब क्या बताऊं दर्द ए दिल की दास्तान मेरे दोस्त


जब हुआ ज़िक्र ज़माने में मोहब्बत का

मुझ को अपने दिल-ए-नाकाम पे रोना आया था


मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था

वो उतनी दूर हो गया जितना दिल के करीब था।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy