एक रात ऐसी जो मां को दूर ले गई
एक रात ऐसी जो मां को दूर ले गई
सोचा न था कि वह रात ऐसी आएगी
इस रात की सुबह मां कभी ना देख पाएगी
रात बात करने की इच्छा उन्होंने जताई थी
मगर मेहमानों के चलते में बात करना पाई थी
सोचा कोई बात नहीं आज नहीं मैं कल बात कर पाऊंगी
किसे था पता कि आज की बात कल पर छोड़ना पड़ेगा मुझको इतना महंगा
इस रात में उठते हुए गिर पड़ी मां पांच भाई बहनों के होते हुए भी कोई ना था पास इतना दुख हो गया जब समाचार हमने यह सुना अपने आप को बहुत कोसा
कि वे अंत समय में क्या कहना चाह रही थी मन की बात भी ना कह पाई
बहुत रोए बहुत बहुत दुखी हूंए और मन में यह सोचा किजाते जाते भी यह पाठ और सिखा गई।
जिंदगी भर उन्होंने सिखाया ही है और हमने सीखा।
और खुद मिट कर यह पाठ सिखा गई, आज का काम करके मत छोड़े ।
क्या पता कल क्या हो जाए और जिंदगी भर अफसोस करने का वारा आवे।
