सपनों का बोझ नहीं लक्ष्य बनाकर सपने पूरे करें
सपनों का बोझ नहीं लक्ष्य बनाकर सपने पूरे करें
जिंदगी में ऊंचे सपने देखने का शौक है ।
कुछ अच्छाकरने का शौक है। सपनों को अपनी मंजिल बनाने का शौक है ।
तो हमको पूरी लगन और मेहनत से उस पर लग ही जाना पड़ता है।
अवरोध कोई भी आए उसको भी पार कर ही जाना पड़ता है।
अपने लक्ष्य को ध्यान में रखकर उस तरफ कदम बढ़ाना होता है।
सपनों का बोझ लेकर नहीं चलना बल्कि उसको कार्यान्वित भी करना होता है।
क्योंकि सपने,
सब सपने खाली रात को देखा और सुबह भूल गए वाला नहीं होते ना।
वह तो अपनी जिंदगी के लक्ष्य को निर्धारित करने वाले होते है।
तो उसको बोझ ना समझ कर अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान देना होता है।
उसको पूरा करना होता है,
और जो अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान देकर उस तरफ मेहनत कर उसको पूरा कर देता है।
वही आखिर में अपने सपनों का सिकंदर बन जाता है।
क्यों सही कह रही हूं ना क्या ख्याल है आपका हमको समीक्षा देकर बतलाइए।
मेरा तो यही ख्याल है जो मैंने आपको बतलाया है।
स्वरचित भाव वैचारिक कविता
